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  • Sanchar Saathi App: क्या आपके मोबाइल को भारत सरकार कंट्रोल करेगी? ‘संचार साथी’ जिस पर मचा है घमासान? सरकार का आदेश, विपक्ष का ‘जासूसी’ का आरोप और प्राइवेसी पर सवाल

    Sanchar Saathi App: क्या आपके मोबाइल को भारत सरकार कंट्रोल करेगी? ‘संचार साथी’ जिस पर मचा है घमासान? सरकार का आदेश, विपक्ष का ‘जासूसी’ का आरोप और प्राइवेसी पर सवाल

    Sanchar Saathi App Controversy: भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा मोबाइल फोनों में ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के निर्देश के बाद से देश में एक नई डिजिटल बहस छिड़ गई है। जहां सरकार इसे साइबर सुरक्षा और फोन चोरी रोकने के लिए एक क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे ‘जासूसी का हथियार’ और ‘पेगासस प्लस प्लस’ करार दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और यह ऐप आपके लिए कैसे काम करेगा।

    बताया जा रहा है कि इस ऐप्लिकेशन को मोबाइल से डिलीट करने वाले यूजर्स को संदिग्ध मना जा सकता है।

    मुख्य बातें (Key Highlights):

    • सरकार का आदेश: सभी नए स्मार्टफोन्स में ‘संचार साथी’ ऐप प्री-इंस्टॉल होना अनिवार्य।
    • डेडलाइन: मोबाइल कंपनियों को आदेश लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।
    • विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने इसे निजता के अधिकार (Privacy) पर हमला और ‘Big Brother’ सर्विलांस बताया।
    • सरकार की सफाई: मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान— “ऐप जासूसी के लिए नहीं, सुरक्षा के लिए है; यूजर चाहे तो डिलीट कर सकते हैं।”
    • ऐप का काम: चोरी हुए फोन को ब्लॉक करना, फर्जी सिम की पहचान और साइबर फ्रॉड रिपोर्ट करना।

    क्या है सरकार का नया आदेश?

    ​भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने 28 नवंबर 2025 को एक अहम गाइडलाइन जारी की। इसके तहत भारत में निर्माण (Manufacture) या आयात (Import) किए जाने वाले सभी मोबाइल हैंडसेट में ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi App) मोबाइल ऐप का प्री-इंस्टॉल होना अनिवार्य कर दिया गया है।

    • नियम: नया फोन सेटअप करते समय यह ऐप स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
    • पुराने फोन: जो डिवाइस पहले से बाजार में हैं या लोगों के पास हैं, उनमें सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इसे पहुंचाया जाएगा।
    • मकसद: सरकार का तर्क है कि यह कदम साइबर ठगी रोकने, चोरी हुए फोन को ट्रैक करने और फर्जी IMEI नंबरों पर नकेल कसने के लिए जरूरी है।

    विपक्ष क्यों बता रहा इसे ‘जासूसी ऐप’? (Political Controversy)

    ​इस आदेश के आते ही राजनीतिक गलियारों में हंगामा मच गया है। विपक्षी दलों ने इसे नागरिकों की निजता (Privacy) का उल्लंघन बताया है।

    1. कांग्रेस का आरोप: कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इसे “असंवैधानिक” करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “बिग ब्रदर हम पर नजर नहीं रख सकता। यह निजता के अधिकार (Article 21) का उल्लंघन है। एक ऐसा सरकारी ऐप जिसे हटाया नहीं जा सके, वह हर भारतीय की गतिविधियों पर नजर रखने का टूल है”
    2. पेगासस से तुलना: कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे “पेगासस प्लस प्लस” (Pegasus++) कहा है। उनका कहना है कि सरकार इसके जरिए लोगों की निजी जिंदगी में ताक-झांक करना चाहती है।
    3. प्रियंका गांधी का बयान: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने इसे “स्नूपिंग ऐप” (जासूसी ऐप) बताते हुए कहा कि फ्रॉड रोकने और हर नागरिक के फोन में झांकने के बीच एक बहुत पतली लकीर है, जिसे सरकार पार कर रही है।

    सरकार की सफाई: क्या ऐप डिलीट किया जा सकता है?

    ​विपक्ष के आरोपों और ‘नॉन-रिमूवेबल’ (Non-removable) ऐप की खबरों के बीच केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़ी सफाई दी है।

    ​सिंधिया ने स्पष्ट किया, “इसके आधार पर न कोई जासूसी है, न कोई कॉल मॉनिटरिंग। अगर आप इसे अपने फोन में रखना चाहते हैं, तो रखो। अगर आप इसको डिलीट करना चाहते हो, तो डिलीट करो। यह मैंडेटरी (अनिवार्य) नहीं है।”

    ​सरकार का कहना है कि यह ऐप पूरी तरह से उपभोक्ताओं की सुरक्षा और साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए है।

    Sanchar Saathi App: आपके लिए कितना काम का? (Features)

    ​विवादों से परे, अगर तकनीकी नजरिए से देखें तो यह ऐप कई महत्वपूर्ण सुविधाएं देता है:

    1. चोरी हुआ फोन ब्लॉक करें (CEIR Module): अगर आपका फोन गुम या चोरी हो जाता है, तो आप इस ऐप के जरिए उसे ब्लॉक कर सकते हैं। ब्लॉक होने के बाद वह फोन किसी भी नेटवर्क पर काम नहीं करेगा और जैसे ही उसमें कोई नया सिम डालेगा, पुलिस को लोकेशन मिल जाएगी।
    2. आपके नाम पर कितने सिम? (TAFCOP): आप चेक कर सकते हैं कि आपके आधार कार्ड/आईडी पर कितने सिम कार्ड एक्टिव हैं। अगर कोई फर्जी सिम है, तो उसे वहीं से रिपोर्ट करके बंद करवाया जा सकता है।
    3. नकली फोन की पहचान: सेकंड हैंड फोन खरीदते समय आप IMEI नंबर डालकर चेक कर सकते हैं कि फोन चोरी का या ब्लैकलिस्टेड तो नहीं है।
    4. फ्रॉड रिपोर्टिंग (Chakshu): संदिग्ध कॉल, मैसेज या व्हाट्सएप फ्रॉड की रिपोर्ट सीधे इस ऐप के ‘चक्षु’ फीचर से की जा सकती है।

    आंकड़े बोलते हैं: सरकार के मुताबिक, इस पोर्टल की मदद से अब तक 6 लाख से ज्यादा चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं और 1.75 करोड़ से ज्यादा फर्जी कनेक्शन काटे गए हैं।

    निष्कर्ष

    ​’संचार साथी’ ऐप सुरक्षा के लिहाज से एक मजबूत कदम है, जो साइबर अपराध और मोबाइल चोरी पर लगाम लगा सकता है। हालांकि, इसे ‘प्री-इंस्टॉल’ और ‘नॉन-रिमूवेबल’ बनाने की शुरुआती खबरों ने प्राइवेसी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। अब मंत्री के “डिलीट करने की आजादी” वाले बयान के बाद देखना होगा कि जब यह ऐप फोन्स में आएगा, तो क्या वाकई यूजर्स को इसे हटाने का विकल्प मिलता है या नहीं।

    FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q: क्या संचार साथी ऐप को फोन से डिलीट किया जा सकता है?

    A: शुरुआती रिपोर्ट में इसे नॉन-रिमूवेबल बताया गया था, लेकिन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बयान दिया है कि यूजर इसे डिलीट कर सकते हैं, यह अनिवार्य नहीं है।

    Q: यह ऐप मेरे फोन में क्या ट्रैक करेगा?

    A: सरकार के अनुसार, यह ऐप IMEI वेरिफिकेशन और सिम कार्ड सुरक्षा के लिए है। यह कॉल या मैसेज के कंटेंट को ट्रैक नहीं करता। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि इसमें निगरानी की क्षमता हो सकती है।

    Q: क्या यह ऐप पुराने फोन्स में भी आएगा?

    A: हाँ, पुराने फोन्स और स्टॉक में मौजूद डिवाइसों के लिए निर्माता कंपनियां सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इसे उपलब्ध कराएंगी।

    Q: संचार साथी ऐप कैसे डाउनलोड करें?

    A: यह ऐप Google Play Store और Apple App Store पर उपलब्ध है। आप इसे मैनुअली भी डाउनलोड कर सकते हैं।