Site icon Suchna Portal

UGC New Rules 2026: क्या है इक्विटी रेगुलेशन? दिल्ली से लखनऊ तक भारी विरोध और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

नई दिल्ली/लखनऊ: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को लेकर देशभर में विवाद गहरा गया है। 15 जनवरी 2026 से प्रभावी इन नियमों को लेकर दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय से लेकर लखनऊ की सड़कों तक भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जहां एक ओर इसे छात्र सुरक्षा के लिए जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सवर्ण समाज और जनरल कैटेगरी के छात्र इसे ‘एकतरफा’ और ‘भेदभावपूर्ण’ करार दे रहे हैं।

क्या है यूजीसी का नया नियम और इक्विटी कमेटी?

​यूजीसी ने इन नियमों को उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता बढ़ाने के लिए लागू किया है। नियमों के मुताबिक:

​यूजीसी का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में इन वर्गों के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की बढ़ोतरी हुई है। साल 2019-20 में 173 शिकायतें थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं, जो इन नियमों की जरूरत को साबित करती हैं।

विरोध का मुख्य कारण: सवर्ण छात्रों का डर और नाराजगी

​सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी के छात्र इन नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. एकतरफा परिभाषा: नियमों में केवल SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात है। जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार माना ही नहीं गया है।
  2. दुरुपयोग की आशंका: छात्रों का आरोप है कि झूठी शिकायतों पर सजा का प्रावधान हटा दिया गया है, जिससे सवर्णों को फंसाने के लिए नियमों का दुरुपयोग हो सकता है।
  3. कैंपस का माहौल: प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इससे परिसरों में ‘अराजकता’ और ‘भय’ का माहौल पैदा होगा और छात्रों के बीच आपसी रिश्तों में खटास आएगी।

​प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं अभागा सवर्ण हूं, मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा…” वहीं, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और ‘Regulation 3(c)’ पर विवाद

​यूजीसी के इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाकर्ता एडवोकेट विनीत जिंदल और मृत्युंजय तिवारी ने रेगुलेशन 3(c) को विशेष रूप से चुनौती दी है।

सरकार का रुख और स्पष्टीकरण

​विवाद बढ़ता देख सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि सरकार बहुत जल्द इन नियमों पर विस्तृत तथ्य (Facts) और स्पष्टीकरण जारी करेगी। सरकार का कहना है कि:

​बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी भ्रांतियों को दूर किया जाएगा और मोदी सरकार ‘गरीब सवर्णों’ (EWS) के हितों की भी रक्षा करेगी।

प्रशासनिक और राजनीतिक असर

​इस विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। लखनऊ में करीब एक दर्जन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इन नियमों के विरोध में पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उत्तर प्रदेश बीजेपी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी यूजीसी को पत्र लिखकर कहा है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को असुरक्षित महसूस करा रहे हैं और इससे सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है।

​फिलहाल, मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यूजीसी इन नियमों में कोई संशोधन करेगी या इसे इसी रूप में लागू रखा जाएगा।

Exit mobile version